मौलिक अधिकारों पर निबंध हिंदी में ?-Essay on Fundamental Rights in Hindi?

मौलिक अधिकार ( Fundamental Rights)

 # मौलिक अधिकार ( Fundamental Rights) क्या है !

भारत का जब संविधान बनाया जा रहा था तो जो भारत का संविधान बना रहे लोग उन सभी के मन मे एक बात बार-बार याद दिलाई जाती थी कि हम तो भी संविधान बनाएगे वो भारत के लोगों कि भलाई के लिए होना चाहिए | 

मौलिक अधिकार ( Fundamental Rights) का मतलब होता है कि ऐसे अधिकार जो भारत के लोगों के जीवन जीने ओर उनके विकास के लिए अवश्यक हो | 

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कुछ मूल अधिकार होने चाहिए  जैसे कि  समानता , स्वतंत्रता क्यूंकि भारत के लोगों ने काफी समय से बहुत कुछ झेला है | अगर 200 से 250 साल पहले कि ही बात कि जाए तो भारत ब्रिटिश सरकार के अधीन था मतलब कुछ ऐसा था कि हम अपने ही देश मे एक गुलामों जेसी जिंदगी जी रहे थे | ब्रिटिश सरकार से पहले मुगलों ने राज किया|

# भारत का संविधान और मौलिक अधिकार ( Fundamental Rights) ! 

भारत ने अपने संविधान मे मौलिक अधिकार ( Fundamental Rights) को भाग 3 मे शामिल किया गया है | अनुच्छेद 14-32 तक मौलिक अधिकार ( Fundamental Rights) के बारे मे बताया गया है |

 भारत ने मौलिक अधिकार ( Fundamental Rights) को अमेरिका के संविधान बिल ऑफ राइट्स 1789 (BILL OF RIGHTS 1789) से लिया हुआ है | अमेरिका दुनिया का पहला ऐसा देश था जिसने अपने नागरिकों को अपने संविधान मे मौलिक अधिकार ( Fundamental Rights) दिए |

भारत के संविधान मे 1978 से पहले 7 मौलिक अधिकार ( Fundamental Rights) हुआ करते थे पर अब भारत के संविधान मे 6 मौलिक अधिकार ( Fundamental Rights) है |

* भाग 3                                                      अनुच्छेद 

1) समानता का अधिकार

 (Rights to equality)                                  14 – 18 

2) स्वतंत्रता का अधिका

 (Rights to freedom)                                19 – 22 

3) शोषण के विरुद्ध अधिकार

 (Rights to agains exploitation)               23 – 24 

4) धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार

( Rights to freedom of religion)               25 – 28 

5) संस्कृति और शैक्षणिक अधिकार

 (Rights for cultural education)                29 – 30 

6) संवैधानिक उपचारों का अधिकार

(Rights to constitutional remedy)                 32  

भारत मे संम्पति का अधिकार(Rights for property) अनुच्छेद 31 मे था पर 44th वे संशोधन 1978  द्रारा हटा कर 300A मे बदल दिया |

भारत के संविधान मे मौलिक अधिकार ( Fundamental Rights) को न्यायसंगत है  संवैधानिक उपचारों का अधिकार

(Rights to consitutional remedy) को  मौलिक अधिकार ( Fundamental Rights) कि आत्मा भी कहा जाता है |

मौलिक अधिकार ( Fundamental Rights) कि विशेषता |

 1 ) नकारात्मक रूप मे लिखा हुआ है कि ऐसे नहीं करना है वैसा नहीं करना है |

2) न्याय के लिए अपील की  जा सकती है |

मौलिक अधिकार किसी भी देश के संविधान में होने पर उस देश के संविधान को काफी ज्यादा अच्छा माना जाता है क्यूंकि किसी देश मैं अपनी जनता के लिए कुछ ऐसे मूल अधिकार प्राप्त हो जिससे वह अपना विकास के सके। भारत देश में तो काफी ज्यादा लोगों द्वारा शासन हुआ है ऐसे में भारत के जनता को जीवन जीने में ज्यादा परेशानी णा हो इसलिए भीम राव अम्बेडकर जी ने भारतीय संविधान में मूल अधिकारों का प्रावधान रखा और साथ ही अगर कोई भारत का व्यक्ति इन मूल अधिकारों को हनन करें तो हम उसे न्यायलाय तक ले जा सकते है। 

@Roy Akash (pkj)  

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