क्षैतिज वितरण क्या हैं?-What are horizontal distributions in Hindi?

horizontal distributions

 #  क्षैतिज वितरण क्या हैं? 

क्षैतिज वितरण  जिससे अभिप्राय है की सरकार के विविध अंग से है। किसी भी देश को चलाने व उस देश/राष्ट्र पर शासन करने के लिए  क्षैतिज वितरण का होना बहुत जरूरी माना जाता है अगर वो देश लोकतांत्रिक है तो उस देश के लिए काफी महत्वपूर्ण हो जाता है। 
क्षैतिज वितरण मे विधायिका (Legislative) ,कार्यपालिका (Executive)और न्यायपालिका (Judiciary) सत्ता के इस बटवारे को हम क्षैतिज वितरण कहते है। क्षैतिज वितरण मे सरकार के विविध अंग  एक दूसरे पर नजर भी रखती है और सरकार को किसी भी कार्य मे बहुत कम समय लगता है।  
इसे हम ऐसे समझ सकते है की अगर किसी काम को एक व्यक्ति करता है तो उस कार्य को करने मे बहुत समय लगता है अगर वही कार्य 3 व्यक्ति द्वारा किया जाए तो वही कार्य जल्दी भी होगा और अच्छे से भी हो सकता है क्यूंकि 3 व्यक्तियों का अपना -अपना कार्य काफी अच्छे से जानते है।  
* विधायिका (Legislative) के अगर हम मुख्य कार्य की बात करें तो वो कार्य कानून बनाना है और यह भारत ससकर का बहुत महत्वपूर्ण अंगों मे से एक है क्यूंकि भारत देश भी एक लोकतांत्रिक देश है।  

* कार्यपालिका (Executive) के मुख्य कार्य की बात की जाए तो वो जो विधायिका (Legislative) द्वारा जो कानून बनाया जाता है उस कानून को पूरे देश मे लागू करने का काम भारत मे कार्यपालिका (Executive) करती है।  

* न्यायपालिका (Judiciary) का मुख्य कार्य है की जो भी कानून का सही से पालन नहीं करता है या कानून का उलंघन करता है तो उसे दंड देने का अधिकार है। 
 जो भारत सरकार की बहुत से भी बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है और भारत देश न्यायपालिका (Judiciary) को स्वतंत्र और सर्वोच्चय माना जाता है यह बात भारत के संविधान मे लिखी हुई है।  
अगर किसी कार्य बाँट दिया जाए और कह दिया जाए की आप एक दूसरे पर नजर भी रख सकते हो की कोई अपनी शक्तियों का द्रुउपयोग ना करें और कह भी दिया जाए की आप एक दूसरे के बिना कुछ भी नहीं हो तो नहीं चहा कर भी आप अपनी मनमानी नहीं कर सकते इसी प्रणाली को हम “नियंत्रण और संतुलन की प्रणाली” (system of checks and balance) के नाम से जानते है।  
ऐसे मे हम कह सकते है की अगर देश मे विधायिका (Legislative) कानून बनाएगी नहीं तो कार्यपालिका (Executive) कानून को लागू क्या करेगी।  अगर कानून लागू ही नहीं होगा तो न्यायपालिका (Judiciary) न्याय कैसे करेगी। 

@Roy Akash (pkj) 

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