रियासतें क्या हैं?-What are princely States in Hindi?

princely states

# देशी रजवाड़े का क्या मतलब होता है ?

अगर हम देशी रजवाड़े की बात करते है तो इसका मतलब होता है की किसी देश में जब छोटे या बड़े एक इलाके पर किसी एक राजा द्वारा शासन किया जाता था| इसे हम इस प्रकार भी समझ सकते है की जिस इलाके में राजा की चलती हो उसे हम रजवाड़े बोल सकते है |

भारत जब 15 अगस्त 1947 को आजाद हुआ था| तो भारत 565 देशी रजवाड़े में बांटा हुआ था हम ऐसे समझ सकते है की आज जो हम भारत देखते है तो 1947 आजादी के समय 565 छोटे-बड़े हिस्सों में बांटा हुआ था |

 

# भारत और देशी रजवाड़े की समस्या क्या थी ?

स्वतंत्रता के समय यह घोषणा की गई थी की 565 देशी रजवाड़े अपनी मर्जी से भारत या पाकिस्तान में शामिल हो सकते है या स्वतंत्र भी रहे सकते थे | पर यह बात भारत के लिए सही नहीं थी| इससे भारत की एकता व अखंडता को खतरा हो सकता था| उस समय अधिकतर देशी रजवाड़े भारतीय संघ में शामिल हो गए परंतु कुछ रियासतों को विलय करने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा | ऐसे मे भारत के सरदार वल्लभभाई पटेल जी ने अहम भूमिका निभाई | इसलिए सरदार पटेल जी को भारत का बिस्मार्क भी कहा जाता है और भारत के लौह पुरुष के माना जाता है |

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1) अवध/हैदराबाद रियासत का विलय :-            हैदराबाद रियासत आज के समय मे आंध्र प्रदेश ,कर्नाटक और महाराष्ट्र के भूभाग के क्षेत्र तक फेली हुई थी| अवध/हैदराबाद रियासत का शासक निजाम था जो जिसने अपने आप को स्वतंत्र  रहने की घोषणा कर दि थी परंतु जनता ने विद्रोह कर दिया क्योंकि शासक निजाम  के दमनकारी शासन से तंग थी| महिलयों ने भी इस विद्रोह मे अपना से सहयोग किया| 

ऐसे में शासक निजाम ने एक अर्ध-सैनिक बल द्वारा निपटने की कोशिश की और लोगों को काफी परेशानी और यातनाएँ दि| इस जुल्म के कारण भारत को ना चाहते हुए भी 13 सितम्बर 1948 को भारत सरकार द्वारा हस्तक्षेप किया | कुछ समय बाद शासक निजाम ने भारत कर आगे हथियार डाल दिए और इस तरह भारत में अवध/हैदराबाद रियासत का विलय हुआ |

2)कश्मीर का विलय :-             स्वतंत्रता के समय कश्मीर के राजा हरि सिंह थे| राजा हरि सिंह ने कश्मीर को स्वतंत्र राज्य बनाए रखने का निर्णय लिया| कुछ समय बाद ही पाकिस्तान ने कबाइली लोगों को  प्रेरणा और सहायता देकर  कश्मीर पर आक्रमण करवा दिया | धीरे-धीरे अक्तूबर तक यह घुसपैठ तेजी से होकर आक्रमण ने बदल गई | 

ऐसे मे कश्मीर केअस्तित्व को खतरा पैदा हो गया | ऐसे मे राजा हरि सिंह ने भारतीय सेना से मदद मांगी तथा भारत ने विलय पत्र पर हस्ताक्षर करके राजा हरि सिंह ने सहमति दि | फिर होना क्या था भारत सेना ने घुसपैठियों को खदेर दिया|  

3) मणिपुर का विलय :-                     मणिपुर के राजा बोधचंद्र सिंह ने भी भारत मे विलय करने से माना कर दिया पर राजा बोधचंद्र सिंह ने भरत को एक आश्वासन के साथ कि मणिपुर की आंतरिक स्वायतता बनी रहेगी और केवल विदेशी मामलों , प्रतिरक्षा और संचार के विषय पर भारत सरकार के अधीन रहेगा 

1948 मे चुनाव के आधार पर राजतन्त्र स्थापित हुआ | भारत मे विलय के प्रश्न पर निर्वाचित विधानसभा मे मतभेद था | इसको देखते हुए भारत सरकार ने मणिपुर के राजा बोधचंद्र सिंह पर दवाव डालकर  निर्वाचित विधानसभा से परामर्श लिए बिना विलय पत्र पर हस्ताक्षर  करवा लिए पर मणिपुर की जानना भारत सरकार के इस फेसले से नाखुश थी |

4) जूनागढ़ रियासत :-          जूनागढ़ का भारत मे विलय कठिन समस्या थी | वहाँ की जनता ने नबाब के विरुद्ध विद्रोह कर दिया था जो पाकिस्तान के मिलकर भारत के खिलाफ़ षड्यन्त्र रच था था | इस विद्रोह को देखते हुए भारत सरकार ने 20 फरवरी 1948 को जनमत संगृह करवा लिया |  जूनागढ़ के अधिकांश लोगो ने भारत के लिए वोट दिया जिसके परिणाम स्वरूप यह भारत का अंग बन गया  

@Roy Akash (pkj) 

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