समाजवादी पार्टी तथा स्वतंत्र पार्टी का वर्णन करें?-Describe Samajwadi Party and Swatantra Party?

Describe Samajwadi Party and Swatantra Party?

#समाजवादी पार्टी तथा स्वतंत्र पार्टी का वर्णन करें?-

Describe Samajwadi Party and Swatantra

 Party?,स्वतंत्र पार्टी का इतिहास

# समाजवादी पार्टी – Samajwadi Party ,समाजवादी पार्टी का इतिहास-

1934 में समाजवादी विचारधारा के समर्थक युवा कांग्रेसी नेताओं ने कांग्रेस समाजवादी पार्टी का गठन किया। ये नेता कांग्रेस को अधिक से अधिक समाजवादी सिद्धांतों की समर्थक पार्टी बनाना चाहते थे। 

1948 में कांग्रेस ने अपने संविधान में परिवर्तन किया तथा दोहरी सदस्यता के सिद्धांत को समाप्त के दिया। परिणामतः कांग्रेस समाजवादी पार्टी कांग्रेस से अलग हो गई तथा समाजवादी पार्टी अस्तित्व में आई। 

#समाजवादी पार्टी का विचारधारा –

1) समाजवादी पार्टी पूंजीवाद के विरुद्ध थी और समाजवाद में निष्ठा रखती थी। 

2) समाजवादी पार्टी पिछड़े वर्गों को विशेष रियायतें देने के पक्ष में थी। 

3) यह पार्टी संवैधानिक साधनों द्वारा समाजवाद की स्थापना के पक्ष में थी। 

4) समाजवादीयो के अनुसार काम का अधिकार नागरिकों का एक मौलिक अधिकार माना जाना चाहिए। लोगों को उचित दाम पर सभी आवश्यक चीजों प्राप्त होनी चाहिए। 

# समाजवादी पार्टी के नेता – 

समाजवादी पार्टी के मुख्य नेताओ में जयप्रकाश नारायण , अशोक मेहता , अच्युत  पटवर्धन , आयार्य नरेंद्र देव , राम मनोहर लोहिया , एस. एम. जोशी  (श्रीधर महादेव जोशी) आदि प्रमुख नेता थे। 

# समाजवादी पार्टी का विघटन –

कुछ समय बाद समाजवादी पार्टी में विघटन की कुछ  ऐसी प्रक्रिया चली की समय- समय पर वह अनेक रूपों में प्रकट हुआ। जैसे की समाजवादी दल , प्रजा समाजवादी दल तथा संयुक्त समाजवादी दल । भारत की राजनीति में जनता दल , राष्ट्रीय जनता दल , समाजवादी पार्टी आदि भी वर्तमान समय में देखने को मिलती है।

# स्वतंत्र पार्टी – Swatantra Party स्वतंत्र पार्टी का इतिहास-

कनैयालाल मानेकलाल मुंशीस्वतंत्र पार्टी का गठन 1959 में सी. राजगोपालचारी (चक्रवर्ती राजगोपालाचारी) के नेतृत्व में हुआ था। के. एम. मुंशी (कनैयालाल मानेकलाल मुंशी) , एन. जी. रंगा तथा मीनू मसानी स्वतंत्र पार्टी के नेता थे। 

स्वतंत्र पार्टी का गठन कांग्रेस के नागपूर अधिवेशन में पारित प्रस्ताव के विरोध में हुआ था। इस प्रस्ताव में जमीन की हदबंदी , खाद्यान्न के व्यापार , सरकारी अधिग्रहण तथा सहकारी खेती का समर्थक किया गया था। 

स्वतंत्र पार्टी का मूलमंत्र था कि  मुक्त अर्थव्यवस्था , मुक्त बाजार और मुक्त व्यापार। स्वतंत्र पार्टी अर्थव्यवस्था में सरकार के बढ़ते हस्तक्षेप की विरोधी थी और व्यक्तिगत स्वतंत्रता को अधिक महत्व देती थी। 

स्वतंत्र पार्टी का मानना था कि भारत का हित USA के साथ अच्छे सम्बंधों से सिद्ध हो सकता था। 1967  के आम चुनाव में स्वतंत्र पार्टी को 44 सीटे मिली परंतु यह इस प्रगति के आगे बढ़ने में कामयाब नहीं रही। इसका कारण स्वतंत्र पार्टी का व्यापक जनाधार न होना था।   

# निष्कर्ष 

भारतीय राजनीति में बहुत सी राजनीति दल आए और चले गए। भारत एक लोकतांत्रिक देश है इसलिए भारत में स्वतंत्रता के पूर्व केवल कांग्रेस पार्टी ही भारत देश मुख्य रूप से कार्य तथा देखने को मिलती थी परंतु स्वतंत्रता के बाद भारतीय राजनीति में कांग्रेस पार्टी के साथ – साथ  बहुत से राजनीति दल देखने को मिल रहे थे। राजनीति दलों की अपनी – अपनी विचारधारा थी। भारत के लिए कुछ ना कुछ अच्छा सोचते थे। ऐसे में ही समाजवादी पार्टी तथा स्वतंत्र पार्टी मुख्य रूप से भारतीय राजनीति में प्रभावी रूप से देखने को मिलती थी।  


@Roy Akash (pkj)

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