Defection

#  दल – बदल से आपका क्या अभिप्राय है। दल-बदल को रोकने के उपाय?-Measures to prevent defection in  Hindi? 

दल – बदल का अर्थ है कि उम्मीदवार ने जिस दल के टिकट पर चुनाव लड़ा हो उस दल का त्याग करके किसी अन्य दल में शामिल होना या निर्दलीय सदस्य के रूप में बने रहना। इसमें सरकारी पक्ष को छोड़कर विरोधी खेमे में मिलना और विरोधी खेमे के व्यक्ति का सरकारी पक्ष में आ जाना भी शामिल है। चौथे आम चुनाव 1967 से दल-बदल की राजनीति शुरू हुई।

# “आया राम गया राम” दल-बदल में भूमिका –

चौथे आम चुनाव 1967 से दल-बदल की राजनीति शुरू हुई। “आया राम गया राम” शब्द भारतीय राजनीति में दल – बदल के पर्यायवाची बन गया है। विधायकों द्वारा तुरंत पार्टी छोड़कर दूसरी पार्टी में शामिल होने की घटना से यह प्रथा शुरू हुई। 

ये शब्द हरियाणा के एक विधायक गयालाल की देन है। 1967 के विधानसभा चुनाव में वह कांग्रेस के टिकट पर विधायक बने थे। बाद में वह संयुक्त मोर्चा सरकार में शामिल हो गए और गयालाल फिर से कांग्रेस में आ गए देखते ही देखते 1 घंटे बाद संयुक्त मोर्चा सरकार में शामिल हो गए। तब हरियाणा के मुख्यमंत्री ने कहा की कांग्रेस पार्टी के विधायक गयालाल “आया राम गया राम” हो गए है। 

# दल-बदल को रोकने के उपाय – 

जैसा हम जानते है कि 1967 से शुरू एक घटना से दल-बदल जैसी प्रकृति भारतीय राजनीति में देखने को मिलती है। इसी दल-बदल को रोकने के लिए भारत सरकार ने कुछ अधिनियम मनाए थे। 

1)  1985 में 52th संविधान संशोधन द्वारा भारतीय संविधान में 10वी अनुसूची के तहत दल-बदल को रोकने के लिए पहला कदम उठाया गया दल-बदल विरोधी कानून (Anti-defection law) को जोड़ कर। 

2) 2003 में जरूरत के हिसाब से दल-बदल विरोधी कानून (Anti-defection law)  में 91th संविधान संशोधन कर कुछ और प्रावधानों को जोड़ा गया। 

लेकिन अभी भी यह दल-बदल जैसी प्रवृत्ति भारतीय राजनीति में देखने को मिल जाती है। दल-बदल विरोधी कानून (Anti-defection law) आने के बाद भी दल-बदल जैसी प्रवृत्ति को रोका नहीं जा सका है। ऐसे में भारत सरकार को और भी कड़े कानून की आवश्यक है।

ऐसे में जो संसद व विधायक एक राजनीति दल की टिकट से जीत कर दूसरी राजनीति दल में जाता है तो ऐसे में उस संसद व विधायक को उसके जीवन में कभी भी चुनाव में खड़े नहीं देना चाहिए चुनाव प्रतिबंध कर देना चाहिए तभी यह दल-बदल को थोड़ा कम किया जा सकता है। भारतीय राजनीति में सुधार आ सकता है। 

दल-बदल एक भारतीय राजनीति में एक भष्टाचार की तरह है। इस दल-बदल भष्टाचार पूरी तरह खत्म करना जरूरी है। क्योंकि भारतीय राजनीति में पहले ही इतना भष्टाचार है। भारतीय राजनीति को आज-कल के युवाओं एक गाली की तरह मानते है। यह सब आज-कल के युवाओं की सोच है। क्योंकि भारतीय राजनीति में काफी ज्यादा भष्टाचार भी है।   

ऐसे में आप अपने विचार रख सकते है की आपके हिसाब से दल-बदल को रोकने के लिए क्या उपाय हो सकते है। अपने विचार नीचे comment box में दे सकते है। 

@Roy Akash (pkj) 

By Roy Akash (pkj)

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