दल-बदल क्यों करते है तथा दल-बदल अधिनियम की आखिरी शक्ति किसके पास होती है?-Why do the defections and who has the last power of the anti-defection act in Hindi?

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 # दल-बदल क्यों करते है तथा दल-बदल अधिनियम  की आखिरी शक्ति किसके पास होती है?

दल-बदल के काफी ज्यादा किसी राजनीति दल पर काफी ज्यादा प्रभाव पड़ता है। जिससे कोई भी राजनीति पार्टी अपने अस्तित्व हो खोने लगती है। दल-बदल जैसी हरकत किसी नहीं संसद या विधायक को नहीं करनी चाहिए क्योंकि इससे राजनीति दल तथा उनके जीवन पर असर पड़ता है। 

ये शब्द हरियाणा के एक विधायक “गया लाल” की देन है। 1967 के विधानसभा चुनाव में वह कांग्रेस के टिकट पर विधायक बने थे। बाद में वह संयुक्त मोर्चा सरकार में शामिल हो गए और “गया लाल” फिर से कांग्रेस में आ गए देखते ही देखते 1 घंटे बाद संयुक्त मोर्चा सरकार में शामिल हो गए। तब हरियाणा के मुख्यमंत्री ने कहा की कांग्रेस पार्टी के विधायक “गया लाल” “आया राम गया राम” हो गए है। 

# दल-बदल कोई भी नेता क्यों करते है? 

1) स्वार्थ तथा लालच  :-                    अगर कोई सांसद या विधायक दल-बदल करता है तो सबसे बड़ा कारण अपना स्वार्थ है क्योंकि स्वार्थी इंसान की किसी के बारे में नहीं सोचता चाहे हो राजनीति पार्टी की क्यों ना हो। लालच के कारण भी कोई सांसद या विधायक दल-बदल कर सकता है।

2) अन्य राजनीतिक दल के प्रति आकर्षण :-                 कोई भी सांसद या विधायक अन्य राजनीतिक दल के प्रति आकर्षण से भी दल-बदल के सकता है। 

3) आत्मसम्मान :-                कभी कभी ऐसा भी होता है की सांसद या विधायक अपने आत्मसम्मान  के लिए दल-बदल कर सकते है। क्योंकि उन्हें अपनी राजनीति दल से सम्मान नहीं मिल रहा हो।  

# दल-बदल अधिनियम  की आखिरी शक्ति किसके पास होती है?

2003 से पहले  दल-बदल अधिनियम की आखिरी शक्ति राज्यसभा के सभापति तथा लोकसभा के स्पीकर के पास होती है। परंतु इस चीज का विरोध किया जाने लगा की राज्यसभा के सभापति तथा लोकसभा के स्पीकर भी किसी ना किसी पार्टी से संबंधित होते है तो यह अन्याय है। 

ऐसे में विरोध को देखते हुए 2003 में 91th संविधान संशोधन हुआ जिसके तहत दल-बदल अधिनियम की आखिरी शक्ति राज्यसभा के सभापति तथा लोकसभा के स्पीकर के पास ना होकर न्यायालय के पास कर दी गई। भारतीय न्यायालय को संविधान में सर्वोच्च माना जाता है। 

दल-बदल चुनाव से पहले करते है तो ज्यादा कोई परेशानी की बात नहीं होती परंतु किसी पार्टी की टिकट पर जीतने के बाद अगर कोई सांसद या विधायक एक राजनीति पार्टी से दूसरी किसी राजनीति पार्टी में जाता है तो उस सांसद या विधायक पर 1985 में हुआ 52th नंबर का संविधान संशोधन के दल-बदल अधिनियम के तहत कार्यवाही की जा सकती है। 


@Roy Akash (pkj)

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