डॉ.बी.आर.अम्बेडकर जी को भारतीय संविधान का मुख्य वास्तुकार क्यों कहा जाता है?- Why is Dr.B.R .Ambedkar called the chief architect of the Indian Constitution?

Dr. B. R Ambedkar called the chief architect of the Indian Constitution

# डॉ.बी.आर.अम्बेडकर जी को भारतीय संविधान का मुख्य वास्तुकार क्यों कहा जाता है?

भारत का संविधान विश्व का सबसे लंबा लिखित संविधान है। भारत का संविधान ब्रिटिश सरकार के समय केबिनेट मिशन द्वारा भारत  के संविधान सभा का गठन किया गया। संविधान सभा में कई समितियों द्वारा भारतीय संविधान  को तैयार किया गया। साथ ही 2 वर्ष 11 महीने और 18 दिन के समय के बाद दुनिया का सबसे लंबा लिखित संविधान तैयार किया गया। भारतीय संविधान में मुख्य भूमिका डॉ. बी. आर. अम्बेडकर जी की  मानी जाती है।

भारतीय संविधान का जनक एवं पिता डॉ. बी. आर. अम्बेडकर जी को माना जाता है। डॉ. बी. आर. अम्बेडकर का पूरा नाम डॉ. बाबा साहब रामजी सकपाल अम्बेडकर जी है। डॉ. बी. आर. अम्बेडकर जी को “भारतीय संविधान का वास्तुकार” भी कहा जाता है। 26 नवम्बर 1949 को भारतीय संविधान तैयार हो चुका था। भारतीय संविधन को 26 जनवरी 1950 को लागू कर किया था।

भारतीय संविधान की सबसे महत्वपूर्ण समिति  प्रारूप समिति (Drafting committee) के अध्यक्ष डॉ. बी. आर. अम्बेडकर जी को बनाया गया था। प्रारूप समिति, भारतीय संविधान में इतनी महत्वपूर्ण इसलिए थी क्योंकि प्रारूप समिति का प्रमुख कार्य भारतीय संविधान को लिखने का था। भारतीय संविधान में अपनी सोच-बुझ के आधार  से क्या भारतीय संविधान में होना चाहिए और क्या नहीं होना चाहिए।

# प्रारूप समिति के 7 सदस्यों के नाम –

1) डॉ. बी. आर. अम्बेडकर जी साथ में अध्यक्ष थे। 

2) K. M. मुंशी
3) N. G. अयांगर
4) कृष्णा स्वामी अयांगर
5) सय्यद मोहम्मद सादुल्लाह
6) B. L. मित्रा
7) D.P. खेतान 

भारतीय संविधान का मुख्य वास्तुकार

बाद में  D.P. खेतान की स्थान पर T.T. कृष्णामाचारी और B. L. मित्रा की जगह N. मध्यवराज आ गए थे।

संविधान सभा ने भी डॉ. बी. आर. अम्बेडकर जी को भारतीय संविधान का “वास्तुकार” माना था क्योंकि  डॉ. बी. आर. अम्बेडकर जी को प्रारूप समिति का अध्यक्ष बनाया गया था। प्रारूप समिति में कुल 7 सदस्य थे। डॉ. बी. आर. अम्बेडकर जी को “वास्तुकार” इसलिए माना जाता है क्योंकि डॉ. बी. आर. अम्बेडकर जी ने कहा था की में प्रारूप समिति के सभी सदस्य गण का अभार व्यक्त किया।

परंतु डॉ. बी. आर. अम्बेडकर जी ने जो कहा था वो दरहसल सही नहीं था। प्रारूप समिति में 7 सदस्यों में से एक सदस्य T. T. कृपाचारी ने नवम्बर 1948 में संविधान सभा के समक्ष एक बात कही थी की जिन  7 सदस्य को संविधान सभा द्वारा प्रारूप समिति सदस्यों का चयन किया था वो प्रारूप समिति के कार्य करने में असमर्थ रहे।

* 7 सदस्यों में से एक सदस्य ने प्रारूप समिति से इस्तीफा दे दिया था परंतु उन सदस्य की जगह अन्य दूसरे सदस्य आ गए थे। 

* इसी बीच प्रारूप के 7 सदस्यों में से एक सदस्य की मृत्यु हो चुकी थी। परंतु उनकी जगह पर अन्य कोई सदस्य नहीं आए। 

* प्रारूप समिति के 7 सदस्यों में से एक सदस्य अमेरिका में थे। उनका स्थान खाली था। 

*  एक अन्य सदस्य व्यक्ति सरकारी कार्यों के चलते इतने व्यस्त रहते थे की प्रारूप समिति के कार्य में सही से भाग नहीं ले सके। 

* 2 सदस्यों का दिल्ली से काफी दूर रहने पर अपनी स्वास्थ्य के चलते प्रारूप समिति के कार्यों में भाग लेने में असमर्थ रहे। 

# निष्कर्ष 

कुल मिला कर बात कि जाए तो निष्कर्ष यही निकलता है डॉ. बी. आर. अम्बेडकर जी के ऊपर की भारतीय संविधान के महत्वपूर्ण कार्य प्रारूप समिति का मुख्य कार्यों का भार आ गया था। परंतु फिर भी डॉ. बी. आर. अम्बेडकर जी ने कभी यह नहीं कहा कि प्रारूप समिति के सभी सदस्यो ने किसी ना किसी वजह से कार्यों में भाग लेने में असमर्थ रहे। 

साथ ही पंडित जवाहर लाल नेहरू जी की आत्मकथा पुस्तक में डॉ. बी. आर. अम्बेडकर जी को भारतीय संविधान का “वास्तुकार” माना था। साथ ही जो भारतीय संविधान तैयार करने में जो सबसे मुश्किल तथा बुद्धिमता का कार्य था वो कार्य डॉ. बी. आर. अम्बेडकर जी को दिया गया। वो इसलिए क्योंकि भारत के सबसे ज्यादा पढे-लिखे की सूची में डॉ. बी. आर. अम्बेडकर जी का प्रथम स्थान था।     

@Roy Akash (pkj)

 

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