केंद्रीय बैंक के कार्यों का वर्णन कीजिए?-Describe the functions of the central bank?

केंद्रीय बैंक के कार्यों का वर्णन कीजिए?-Describe the functions of the central bank?

 # केन्द्रीय बैंक के कार्यों का वर्णन करें?-Describe the functions of the central bank? केन्द्रीय बैंक के पाँच प्रमुख कार्यों का वर्णन कीजिए?,kendriya bank ke karya ka varnan karen

अगर केन्द्रीय बैंक की परिभाषा की बात करें तो हमें पता चलेगा कि “केन्द्रीय बैंक वह बैंक है। जो किसी देश के मौद्रिक और बैंकिंग ढांचे के शिखर पर होता है।” भारत में केन्द्रीय बैंक का नाम “भारतीय रिजर्व बैंक”(Reserve Bank of India) (RBI) है। 

# केन्द्रीय बैंक के कार्य निम्नलिखित है -functions of central bank :-

1) नोट जारी करना :-          केन्द्रीय बैंक देश में मुद्रा जारी करने का एकाधिकारी होता है क्योंकि मुद्रा का निर्गमन (Issue) केन्द्रीय बैंक की जिम्मेदारी होती है, इसलिए केन्द्रीय बैंक को समस्त जारी की गई मुद्रा के मान के बराबर संपत्तियो  का सुरक्षित भंडार रखने का दायित्व भी होता है।

इन संपत्तियों में सोना, चाँदी व इनके बने सिक्के विदेशी मुद्रा और राष्ट्रीय सरकार की स्थानीय करेंसी प्रतिभूतियाँ शामिल होती है।

केन्द्रीय बैंक द्वारा जारी नोट सारे देश में असीमित विधि मान्य मुद्रा घोषित होती है।

देश की केंद्र सरकार को केन्द्रीय बैंक से ऋण लेने व अपनी जमायों को केन्द्रीय बैंक में जमा करने का अधिकार होता है।

2) सरकार का बेंकर :-          “सरकार का बैंकर” का अर्थ यह है कि केन्द्रीय बैंक सरकार को वही बैंकिंग सेवाएं व्यावसायिक बैंक आम जनता को देते है। यह सरकार की जमाएं स्वीकार करता है और सरकार को ऋण भी देता है।

केन्द्रीय बैंक राज्य सरकारों का भी बैंकर होता है। इसलिए केन्द्रीय बैंक उनके सारे बैंक उनके सारे बैंक संबंधी कार्य करता है तथा सरकार के सारे हिसाब-किताब अपने पास रखता है। सरकार भी अपने सारे चालू खाते (current accounts) के नकद कोष (cash fund) केन्द्रीय बैंक के पास जमा रखती है।

सरकार का बैंकर के रूप में केन्द्रीय बैंक उसकी ओर से भुगतान स्वीकार करना, भुगतान करना और विनिमय लेन-देन आदि के कार्यों का सम्पादन करता है। यह सरकार को अल्पकालीन ऋण भी प्रदान करता है।

केन्द्रीय बैंक, सरकारी एजेंट के रूप में भी कार्य करता है। यह बैंक सरकार के लिए प्रतिभूतियो और खजाने से संबंधित बिलों आदि का क्रय- विक्रय (Buy-sell) करता है।

केन्द्रीय बैंक, सरकार की वित्तीय सलाहकार के रूप में भी कार्य भी करता है। वह सरकार को समय-समय पर मौद्रिक बैंकिंग और वित्तीय मामलों में परामर्श (Consultation) देता है।

3) बैंकों का बैंक :-      यह देश के अन्य व्यावसायिक बैंकों के लिए बैंकर का कार्य करता है अर्थात अन्य बैंकों के साथ केन्द्रीय बैंक का संबंध वैसा ही होता है जैसा की एक व्यक्ति का व्यावसायिक बैंक के साथ होता है।

अन्य सभी बैंकों को अपनी जमायों का कुल प्रतिशत में से कुछ प्रतिशत केन्द्रीय बैंक को कानूनन जमा करनी होती है। जिसे नकद रिजर्व अनुपात (cash reserve ratio) (CRR) कहते है।

जिसके द्वारा केन्द्रीय बैंक अर्थव्यवस्था में मुद्रा व साख निर्मित पर नियंत्रण रखता है, तथा देश में तेजी आने से रोकता है।

अन्य बैंक नकद रिजर्व अनुपात (cash reserve ratio) (CRR) के अलावा और कुछ ना कुछ राशि भी केन्द्रीय बैंक के पास जमा रखता है, ताकि संकट के समय अपने ग्राहकों द्वारा अधिक राशि निकालने की कठिनाइयों से निपटा जा सके।

केन्द्रीय बैंक अन्य बैंकों को कोषों का संरक्षण होता है तथा जरूरत के समय उनको अल्पकालीन और दीर्घकालीन ऋण प्रदान करता है।

केन्द्रीय बैंक सभी व्यापारिक बैंक के कार्यों को पर्यवेक्षक (supervisor) , विनियमन (regulation) और नियंत्रण भी करता है। केन्द्रीय बैंक अन्य बैंकों को लाइसेंस दे कर तथा उन शाखाओं के विस्तार की अनुमति देता है। यह बैंकों को एक- दूसरे में विलय व बैंकों को बंद करने की इज्जत देता है। दूसरे बैंकों को अपने हिसाब- किताब का ब्यौरा नियमित रूप से केन्द्रीय बैंक को भेजना पड़ता है।

4) अंतिम ऋणदाता :-         केन्द्रीय बैंक अंतिम ऋणदाता से अभिप्राय है यह है कि  जब वाणिज्य बैंक संकट के समय अपने सारे साधन जुटाने के बाद भी ग्राहकों द्वारा मांगी गई नकद राशि का प्रबंध नहीं कर सकते तो वे अंतिम उपाय के रूप में रिजर्व बैंक का दरवाजा की ओर देखते है।

कठिनाइयों का समान करने के लिए केन्द्रीय बैंक से ऋण मांगते है। तब केन्द्रीय बैंक उन्हें उधार देता है और उनकी सही मांगो को प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से पूरा करने की जिम्मेदारी अपने ऊपर ले लेता है। केन्द्रीय बैंक उधार देने के लिए बैंकों से कुछ जमा लेते है।

केन्द्रीय बैंक सभी ग्राहकों को उन की नकद राशि दे के बैंकों को फिर से कार्य करने फिर से कार्य करने का फिर से शुरू करते है।

5) विदेशी मुद्रा कोषों का संरक्षण :-      विदेशी मुद्रा का अर्थ है कि विदेशी करेंसी को कहते है। केन्द्रीय बैंक अन्य देशों से प्राप्त विदेशी मुद्रा के कोष का संरक्षण करता है।

देश के नागरिकों को बाहर से प्राप्त की गई विदेशी मुद्रा, केन्द्रीय बैंक के पास जमा करवानी होती है। यदि नागरिकों को विदेशी मुद्रा से बाहर कोई उपहार देने हो तो उन्हें केन्द्रीय बैंक से निवेदन करके उस देश की करेंसी प्राप्त करनी होती है।

अपने देश की मुद्रा इकाई के बाहरी मूल्य को अर्थात विनिमय दर (exchange rate) को स्थिर रखना केन्द्रीय बैंक का महत्वपूर्ण कार्य बन गया है।

# निष्कर्ष 

अगर हम केन्द्रीय बैंक के कार्यों की बात करें तो बहुत है, परंतु हमने केन्द्रीय बैंक के कुछ प्रमुख कार्यों को बताने की कोशिश की है। जैसे की हम जानते है कि भारत देश का केन्द्रीय बैंक “भारतीय रिजर्व बैंक” (RBI) है। 

अगर आपको यह जानकारी की थोडी से भी मदद मिले तो हमें जरूर नीचे दिए गए Comments Box में बताए। अपना feedback भी जरूर दे। 

 @ Roy Akash (pkj) & Jatin Roy 

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