ब्रीक्स (BRICS)

ब्रीक्स (BRICS) की संकल्पना:-

ब्रीक्स (BRICS) की संकल्पना की बात की जाए तो अमेरिका की एक वैश्विक वित्तीय कम्पनी गोल्डमैन सैक्स के प्रसिद्ध एक अर्थशास्त्री जिम- ओ-नील ने 2001 में ब्रिक(bric) शब्द सर्वप्रथम प्रयोग किया था। ब्रिक(bric) के नाम 4 देशों के नाम पर रखा गया था B से ब्राजील ,R से रूस ,I से इंडिया और C से चीन है।

जिम-ओ-नील द्वारा एक रिपोर्ट तैयार की गई थी जिसका नाम दरेआमींग विद ब्रिक: द पाथ 2050 (Dreaming with BRIC’S: the path 2050) (ब्रिक के साथ सपने देखना: 2050 तक का रास्ता) जिसके अंतर्गत 2050 तक वैश्विक स्तर पर 4 सबसे बड़ी उभरती हुई अर्थव्यवस्था वाले देशों की बात की गई थी।

विश्व अर्थव्ययवस्था का भार ब्रिक के 4 देशों के हाथ में आ सकती है। ब्राजील और रूस ऊर्जा आपूर्ति तथा कच्चा माल आपूर्ति को पूरा कर सकता है। भारत और चीन विनिर्माण तथा सेवा आपूर्ति कर सकता है।

ब्रीक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन:-

ब्रीक्स (BRICS) 21 वीं शताब्दी की शुरुआत में बना हुआ एक संगठन है परंतु ब्रीक्स (BRICS) की सदस्यों के मध्य अभी तक कोई भी संधि या समझोंता नहीं हुआ है।

ब्रीक्स (BRICS) की सदस्यों देशों ने पहली बार संयुक्त राष्ट की 2006 की महासभा में विचार किया था। कुछ वर्षों के बाद धीरे-धीरे ब्रिक की शुरुआत होने लगी। 2009 में ब्रीक्स (BRICS) का पहला शिखर सम्मेलन हुआ। इस सम्मेलन में 4 देशों ने हिस्सा लिया ब्राजील, रूस, भारत तथा चीन। शिखर सम्मेलन रूस के येकातेरिनबर्ग में 16 जून 2009 को आयोजित किया गया था जिसमें सदस्यों देशों के नेताओ ने इस शिखर सम्मेलन में हिस्सा लिया। दिमित्री मेदवेदेव (रूस), हू जिंताओ (चीन) और मनमोहन सिंह (भारत)। 2009 में ब्रीक्स (BRICS) का पहला शिखर सम्मेलन में वैश्विक वित्तीय व्यवस्था पर चर्चा की गई थी।

ब्रीक्स (BRICS) के 2010 में दूसरे शिखर सम्मेलन ब्राजील में आयोजित किया गया था। जिसमें दक्षिण अफ्रीका को 24 दिसम्बर 2010 को आधिकारिक तौर पर ब्रिक का सदस्य बना।

ब्रीक्स (BRICS) का 2012 में भारत की राजधानी नई दिल्ली में चौथा शिखर सम्मेलन मनमोहन सिंह भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री के द्वारा आयोजीत किया गया। अब तक ब्रीक्स (BRICS) के 13 शिखर सम्मेलन हो चुके है। 9 सितम्बर 2021 को वर्चुअल मीटिंग (virtual meeting) भारत के वर्तमान प्रधानमंत्री के अध्यक्षता में हुई थी।

ब्रीक्स (BRICS) के उदेश्य:-

ब्रीक्स (BRICS) सदस्यों का सबसे महत्वपूर्ण एक लक्ष्य एक ध्रुवीय दुनिया से बहु-ध्रुवीय दुनिया बनाना जिससे की विश्व की अर्थव्यवस्था पर केवल अमेरिका का की दबदबा न हो।

1990-2010 तक का वैश्विक स्तर की बात की जाए तो हमें पता चलेगा की अमेरिका का एकछत्र राज रहा है। 1990 के शीत युद्ध के बाद से वर्तमान समय की बात करें तो अमेरिका का वर्चस्व कायम है।

विश्व व्यवस्था पर एक ध्रुवीय दुनिया जो अमेरिका है जिसने बाजार अर्थव्यवस्था, अंतरराष्ट्रीय विनिमिय मुद्रा (डॉलर), सैन्य, तकनीक, बहुराष्ट्रीय कंपनी, अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष और विश्व बैंक, तथा सांकृतिक आदि पर अपना ही वर्चस्व कायम रहता है। इन सभी को परिस्थितियो को देखते हुए है। ब्रिक सामने आया।

ब्रीक्स (BRICS) बैंक/न्यू डेवलपमेंट बैंक: एनडीबी (New Development Bank: NDB) की स्थापना:-

ब्रीक्स (BRICS) बैंक जिसे हम दक्षिण बैंक (South Bank) तथा न्यू डेवलपमेंट बैंक: एनडीबी (New Development Bank: NDB) कर रूप में भी जानते है।

ब्रीक्स (BRICS) बैंक की रूपरेखा 2014 में की गई थी। 15 जुलाई 2015 को न्यू डेवलपमेंट बैंक: एनडीबी (New Development Bank: NDB) की स्थापना मानी जाती है लेकिन न्यू डेवलपमेंट बैंक: एनडीबी (New Development Bank: NDB) की उद्घाटन 21 जुलाई 2015 को हुई थी। $100 बिलियन की प्रारंभिक अधिकृत पूंजी के साथ एक नया विकास बैंक स्थापित करने का निर्णय लिया

न्यू डेवलपमेंट बैंक: एनडीबी (New Development Bank: NDB) का मुख्यालय शंघाई (चीन) में है। न्यू डेवलपमेंट बैंक: एनडीबी (New Development Bank: NDB) की शाखा जोहान्सबर्ग जो दक्षिण अफ्रीका में है। न्यू डेवलपमेंट बैंक: एनडीबी (New Development Bank: NDB) का पहला अध्यक्ष के.वी.कामथ थे जो 2015 – 2020 तक कार्यकाल पर रहे साथ ही के.वी.कामथ भारत के आईसीआईसीआई बैंक (icici bank) कर निदेशक (director) भी रहे है।

ट्रॉयजो एक ब्राजीलियाई राजनीतिक अर्थशास्त्री, उद्यमी, सामाजिक वैज्ञानिक, राजनयिक और लेखक हैं। वह वार्ता के निर्णायक दौर में प्रमुख वार्ताकारों में से एक थे, जिसने मर्कोसुर-यूरोपीय संघ समझौते की स्थापना की , जो विश्व व्यापार इतिहास में आर्थिक ब्लॉकों के बीच सबसे बड़ी संधि थी। मई 2020 – 2025 तक न्यू डेवलपमेंट बैंक: एनडीबी (New Development Bank: NDB) के दूसरे अध्यक्ष है।

न्यू डेवलपमेंट बैंक: एनडीबी (New Development Bank: NDB) के उदेश्य:-

1) एक ध्रुवीय दुनिया से बहु-ध्रुवीय दुनिया बनाना।
2) डॉलर का विकल्प विश्व स्तर पर।
3) अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष और विश्व बैंक का विकल्प के रूप में विकसित होना।
4) उभरती हुई विकासशील अर्थव्यवस्था की आधारभूत परियोजना के लिए एक अच्छा विकल्प उपलब्ध करवाना।

ब्रीक्स (BRICS) के समक्ष चुनौतियां:-

ब्रीक्स (BRICS) के सदस्य देशों के बीच आपसी मदभेद की स्थिति का होना की ब्रीक्स (BRICS) के सामने सबसे बड़ी चुनौती है क्यूंकि भारत और चीन के मध्य इतने विवाद है की वह एक दुसरे पर विश्वास ही नहीं है। वर्तमान समय में रूस और उक्रेन के मध्य युद्ध।

निष्कर्ष:-

ब्रीक्स (BRICS) एक अच्छा विकल्प है परंतु ब्रीक्स (BRICS) में अभी भी बहुत से खामियाँ है जिसे दूर किए बिना ब्रीक्स (BRICS) अपने लक्ष्य को प्राप्त नहीं कर सकेगा। जिसे की ब्रीक्स (BRICS) के सदस्य देश 4 महाद्वीपों का प्रतिनिधित्व करते है।

Roy Akash (pkj)

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By Roy Akash (pkj)

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